सोमवार को, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के अंतर्गत आने वाले कई इलाकों में औचक निरीक्षण किया। इसका उद्देश्य यह जांचना था कि प्रदूषण नियंत्रण के तय नियमों का ठीक से पालन हो रहा है या नहीं।
दिल्ली में हवा की गुणवत्ता 'खराब' (poor) श्रेणी में पहुंचने के बाद, राज्य सरकार 'एक्शन मोड' में आ गई है। सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के मौजूदा नियमों की निगरानी बढ़ा दी है। सोमवार को, पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के तहत आने वाले कई इलाकों में औचक निरीक्षण किया।
उन्होंने वहां मौजूद प्रदूषण नियंत्रण उपायों का जायजा लिया और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इन निरीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि 'ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान' (GRAP) और 'विंटर एक्शन प्लान' के तहत जारी दिशा-निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं।
**लापरवाही पर सख्त कार्रवाई**
निरीक्षण के दौरान, सिरसा ने जांच की कि ऊंची इमारतों, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, बड़े होटलों और निर्माण स्थलों पर लगी 'एंटी-स्मोग गन' और 'वॉटर-मिस्ट सिस्टम' ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। ये सिस्टम धूल के कणों को हवा में फैलने से रोकने के लिए लगाए जाते हैं। मंत्री ने निर्देश दिया कि जो इमारतें नियमों या तय मानकों का पालन नहीं करती हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
**ऊंची इमारतों पर विशेष ध्यान**
दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, कुछ खास कमर्शियल, संस्थागत और हॉस्पिटैलिटी प्रतिष्ठानों (जैसे होटल और बैंक्वेट हॉल) के लिए प्रदूषण नियंत्रण के जरूरी उपाय लागू करना अनिवार्य है। पांच मंजिल या उससे ऊंची इमारतों (ग्राउंड फ्लोर सहित) और 3,000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र (built-up area) वाली इमारतों की निगरानी बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों के चारों ओर उचित ऊंचाई वाले टिन शेड या बैरिकेड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि धूल को हवा में फैलने से रोका जा सके। साथ ही, निर्माण सामग्री—जैसे रेत, सीमेंट और मिट्टी—को तिरपाल से अच्छी तरह ढकना भी अनिवार्य होगा।
1 नवंबर से किन वाहनों पर रोक लगाई जाएगी? सिरसा ने बताया कि 1 नवंबर से दिल्ली में उन वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी होगी जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं। उन्होंने वाहन मालिकों से यह भी अपील की है कि वे अपने पास वैध 'पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट' (PUCC) जरूर रखें।