चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, उनकी सूची संबंधित मतदान केंद्रों पर लगाई जाए, ताकि वे अपना नाम देख सकें और उसे फिर से जुड़वाने के लिए कदम उठा सकें।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने निर्देश दिया है कि जिन राज्यों में अभी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया चल रही है, वहां एक विशेष अभियान चलाया जाए। इसका उद्देश्य उन मतदाताओं की पहचान करना है, जिनके नाम मतदाता सूची के ड्राफ्ट से हटा दिए गए हैं। यह निर्देश दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, नागालैंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड पर लागू होता है। इस पहल के तहत, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उन लोगों के घर फिर से जाएंगे जिनके नाम हटा दिए गए हैं, ताकि यह पुष्टि की जा सके कि वे अभी भी दर्ज पते पर ही रह रहे हैं या नहीं।
इसके अलावा, चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि जिन मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, उनकी सूची संबंधित मतदान केंद्रों पर लगाई जाए, ताकि वे अपनी स्थिति की जांच कर सकें और अपना नाम फिर से जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकें। आयोग ने इसके लिए एक विशेष फॉर्म भी जारी किया है। ECI के अनुसार, यह सुविधा उन मतदाताओं के लिए है जिन्हें गणना फॉर्म (enumeration form) तो दिए गए थे, लेकिन सत्यापन प्रक्रिया के दौरान उन्हें ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिया गया—चाहे वे अनुपस्थित, कहीं और स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट (दोहरी प्रविष्टि) के रूप में चिह्नित किए गए हों।
सख्त निगरानी के निर्देश
चुनाव आयोग ने अधिकारियों को कड़ी निगरानी रखने का भी निर्देश दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र मतदाता को अंतिम मतदाता सूची में शामिल होने के अवसर से वंचित न रखा जाए, और साथ ही किसी भी फर्जी या डुप्लिकेट प्रविष्टि को जुड़ने से रोका जा सके। ECI के अनुसार, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मतदाता सूची के लिए 'निरंतर अद्यतन' (Continuous Update) व्यवस्था के तहत, ऐसे पात्र मतदाताओं के नाम अभी भी जोड़े जा सकते हैं जो पहले छूट गए थे। ECI ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को इस प्रक्रिया को सुगम बनाने का निर्देश दिया है।
प्रक्रियाओं और आदेशों पर ECI का स्पष्टीकरण
इससे पहले एक हलफनामे में, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आंतरिक कार्य आवंटन और एक विशिष्ट अधिकारी के कामकाज को लेकर उठाए गए सवालों पर स्पष्टीकरण दिया था। ECI ने कहा कि कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र आयोग या उसके IT विभाग से जुड़े किसी नीतिगत मामले से संबंधित नहीं था। बल्कि, यह चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा मामला था। ECI के अनुसार, संबंधित अधिकारी द्वारा काम के पुनर्वितरण (रीडिस्ट्रिब्यूशन) के लिए जारी किए गए आदेशों को, दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देशों के बाद लागू नहीं किया गया।