नगीना के सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने आरक्षण पर मोहन भागवत के बयान की कड़ी आलोचना की और साथ ही अखिलेश यादव का भी ज़िक्र किया।
नगीना (उत्तर प्रदेश) से लोकसभा सांसद और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख की आरक्षण पर की गई टिप्पणी की तीखी आलोचना की। ऐसा करते हुए, आज़ाद ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से जुड़ा एक अहम दावा भी किया।
उन्होंने पूछा कि जाति जनगणना आख़िर कब होगी। उन्होंने सवाल किया कि पूर्व मुख्यमंत्री की कुर्सी को गंगाजल से क्यों धोया गया था; क्या पहले वाले मुख्यमंत्री काबिल नहीं थे? नगीना के सांसद ने ज़ोर देकर कहा कि आगे की लड़ाई लंबी है।
गौर करने वाली बात है कि अखिलेश यादव अक्सर आरोप लगाते रहे हैं कि मार्च 2017 में यूपी में सत्ता बदलने के बाद—जब योगी आदित्यनाथ राज्य के मुख्यमंत्री बने—तो 5, कालिदास मार्ग स्थित आधिकारिक सीएम आवास को गंगाजल से धोया गया था।
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों पर कभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
**अधिकारों के ख़िलाफ़ धर्म: आज़ाद**
चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि जब 1990 में मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू की जा रही थीं, उसी समय 'कमंडल' (धार्मिक लामबंदी का प्रतीक) की राजनीति भी शुरू कर दी गई थी। उन्होंने सवाल किया कि 'कमंडल' यात्रा किसने शुरू की थी। उन्होंने तर्क दिया कि जब भी लोगों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई, तो उन्हें रोकने के लिए धर्म का मुद्दा खड़ा कर दिया गया।
चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि आज तक मंडल आयोग की सिफ़ारिशों का एक प्रतिशत भी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, फिर भी लोग उतने से ही संतुष्ट रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार मंडल आयोग की सभी सिफ़ारिशें लागू करे, वरना सत्ता छोड़ दे। आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) आरक्षण का ज़िक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि जो लोग आरक्षण की आलोचना करते हैं, वे ख़ुद इसका फ़ायदा क्यों उठाते हैं और साथ ही इस व्यवस्था को बुरा-भला भी कहते हैं।