केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि देश में तेल और गैस काफ़ी मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि अफ़वाहों की वजह से लोगों में घबराहट फैल गई है, जिससे गैस की मांग अचानक बढ़ गई है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच दुनिया भर में तेल संकट का डर बढ़ गया है। हालांकि, भारत सरकार ने साफ़ किया है कि देश में अभी तेल और गैस की कोई कमी नहीं है, और सप्लाई नॉर्मल बनी हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि देश में तेल और गैस काफ़ी मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि अफ़वाहों की वजह से लोगों में घबराहट फैल गई है, जिससे गैस की मांग अचानक बढ़ गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई आज से फिर से शुरू हो जाएगी। ग्रामीण इलाकों के कंज्यूमर्स को 45 दिनों के अंदर दोबारा बुकिंग का ऑप्शन दिया जाएगा। मंत्री के मुताबिक, भारत की रिफाइनरियां पूरी क्षमता, यानी 100% प्रोडक्शन पर काम कर रही हैं, और घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।
इंडियन ऑयल का भरोसा
देश की जानी-मानी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी एक बयान जारी कर कहा है कि वह पूरे देश में बिना रुकावट फ्यूल सप्लाई पक्का करने के लिए लगातार काम कर रही है। कंपनी के मुताबिक, उसके सभी फ्यूल स्टेशन नॉर्मल तरीके से चल रहे हैं और पेट्रोल और डीज़ल की काफी सप्लाई है। उसने लोगों से सिर्फ भरोसेमंद जानकारी पर ही भरोसा करने और अफवाहों से बचने की भी अपील की है।
भारत की तेल पर निर्भरता
भारत अपनी कुल तेल ज़रूरतों का लगभग 80% इम्पोर्ट करता है। इसलिए, ग्लोबल एनर्जी मार्केट में कोई भी अस्थिरता भारत पर असर डाल सकती है।
इस बीच, ग्लोबल सप्लाई बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
अमेरिका ने अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व से 172 मिलियन बैरल कच्चा तेल निकाला है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने कहा है कि उसके सदस्य देश इमरजेंसी रिज़र्व से 400 मिलियन बैरल तेल मार्केट में निकालेंगे।
बताया जा रहा है कि 1973 के ऑयल क्राइसिस के बाद यह छठी बार है जब ऑर्गनाइज़ेशन ने ग्लोबल तेल सप्लाई को स्टेबल करने के लिए ऐसा कदम उठाया है। 28 मार्च को जब इज़राइल ने ईरान पर एयरस्ट्राइक की, तो वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ गया। यह लड़ाई अब करीब दो हफ़्ते से चल रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह लड़ाई लंबे समय तक चलती है, तो इसका ग्लोबल ऑयल सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिसका असर भारत समेत कई देशों की इकॉनमी पर पड़ सकता है।