- पिछले साल रेजिडेंशियल सेल्स में 12% की गिरावट आई थी; इस बार निर्मला सीतारमण से रियल एस्टेट सेक्टर की मुख्य मांगें क्या हैं?

पिछले साल रेजिडेंशियल सेल्स में 12% की गिरावट आई थी; इस बार निर्मला सीतारमण से रियल एस्टेट सेक्टर की मुख्य मांगें क्या हैं?

दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों ने इस आर्थिक मंदी के दौरान बेहतर प्रदर्शन किया है। बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में 2025 के दौरान रेजिडेंशियल बिक्री में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो 1.33 लाख यूनिट से ज़्यादा हो गई।

हालांकि, 2025 के दौरान देश के टॉप आठ प्रमुख शहरों में रेजिडेंशियल बिक्री में गिरावट आई। रियल एस्टेट कंसल्टिंग फर्म PropTiger के डेटा के अनुसार, 2025 में इन शहरों में कुल 386,365 रेजिडेंशियल यूनिट्स बेची गईं, जो 2024 में दर्ज 436,992 यूनिट्स से लगभग 12 प्रतिशत कम है। खरीदारों की बढ़ती सावधानी, ऊंची कीमतें और ब्याज दरों का असर इस गिरावट के मुख्य कारण माने जा रहे हैं। हालांकि, यह स्थिति डिमांड में गिरावट का संकेत नहीं देती है, बल्कि यह दिखाती है कि खरीदार अब ज़्यादा सोच-समझकर फैसले ले रहे हैं।

रेजिडेंशियल घरों की बिक्री में गिरावट

हालांकि, दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों ने इस मंदी के दौरान बेहतर प्रदर्शन किया है। बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में 2025 के दौरान रेजिडेंशियल बिक्री में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो 1.33 लाख यूनिट से ज़्यादा हो गई। इन शहरों में IT और सर्विस सेक्टर में रोज़गार, स्थिर आय और किफायती और मिड-सेगमेंट हाउसिंग की उपलब्धता ने डिमांड को मज़बूत किया है। इसके अलावा, कोलकाता में भी रेजिडेंशियल बिक्री में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई, जबकि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, दिल्ली-NCR, पुणे और अहमदाबाद जैसे बड़े बाज़ारों में बिक्री में गिरावट आई।

ऑरम प्रॉपटेक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ओमकार एस. के अनुसार, 2025 को डिमांड में गिरावट के बजाय रीकैलिब्रेशन का साल माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि डेवलपर्स ने सप्लाई को कंट्रोल करके एक संतुलित रणनीति अपनाई, जिससे कम बिक्री के बावजूद कीमतें स्थिर रहीं। यह साफ तौर पर दिखाता है कि बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, रियल एस्टेट सेक्टर अपनी बुनियादी मज़बूती बनाए हुए है।

प्रमुख नीतिगत फैसलों से उम्मीदें

आने वाले केंद्रीय बजट को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर में सकारात्मक उम्मीदें हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना ​​है कि अगर बजट में होम लोन पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जाती है, स्टाम्प ड्यूटी में राहत दी जाती है, और किफायती और मिड-इनकम हाउसिंग को प्रोत्साहन दिया जाता है, तो इससे रेजिडेंशियल डिमांड को नई गति मिल सकती है। इसके अलावा, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़कों, मेट्रो और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में बढ़े हुए निवेश से रियल एस्टेट सेक्टर को लंबे समय तक सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

रियल एस्टेट इंडस्ट्री का मानना ​​है कि नीतिगत स्थिरता और आसान मंज़ूरी प्रक्रियाएं निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक बैलेंस्ड और दूरदर्शी बजट न सिर्फ़ घर खरीदारों को राहत देगा, बल्कि डेवलपर्स और इन्वेस्टर्स के लिए नए मौके भी पैदा करेगा, जिससे आने वाले सालों में रियल एस्टेट सेक्टर की ग्रोथ मज़बूत हो सकती है।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि पॉलिसी में स्थिरता और क्लैरिटी से इन्वेस्टर का भरोसा और मज़बूत होगा, जिससे घरेलू और विदेशी दोनों तरह के इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिल सकता है। उनका कहना है कि अप्रूवल प्रोसेस को आसान बनाने और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस जैसे सुधारों को लागू करने से प्रोजेक्ट्स की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होगी और डेवलपर्स के लिए लागत कम होगी। इससे पूरे सेक्टर में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और मार्केट को लंबे समय तक स्थिरता मिलेगी।

गंगा रियल्टी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीरज के. मिश्रा कहते हैं कि रियल एस्टेट सेक्टर देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाता है और उन्हें आने वाले बजट से प्रैक्टिकल राहत की उम्मीद है। उनके मुताबिक, होम लोन पर टैक्स डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने और किफायती घरों के लिए अतिरिक्त इंसेंटिव देने से एंड-यूज़र की डिमांड बढ़ेगी। इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर लगातार फोकस करने से रोज़गार के नए मौके पैदा होंगे और सेक्टर की ग्रोथ को स्थिरता मिलेगी। एक बैलेंस्ड और दूरदर्शी बजट रियल एस्टेट के लिए संभावनाओं के नए रास्ते खोल सकता है।

वहीं, ट्रेहन ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर सारांश ट्रेहन का मानना ​​है कि बजट में मिड-इनकम और किफायती घरों को प्राथमिकता देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि स्टैंप ड्यूटी में राहत और अप्रूवल प्रोसेस को आसान बनाने से प्रोजेक्ट्स की गति तेज़ होगी। इसके अलावा, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में ज़्यादा इन्वेस्टमेंट से लंबे समय में रियल एस्टेट की डिमांड को सपोर्ट मिलेगा और खरीदारों का भरोसा और मज़बूत होगा।

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