इजरायली चुनावों के बाद, गादी एजेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिल गया है, जबकि बेंजामिन नेतन्याहू को 46 सांसदों का समर्थन प्राप्त हुआ है। CJP नेता सौरव दास ने नेतन्याहू के पिछड़ने पर अपनी संतुष्टि जताई है।
इजरायली चुनावों में बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ा झटका लगा है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के पूर्व चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, गादी एजेनकोट, अगली सरकार बनाने की दौड़ में सबसे आगे निकल गए हैं, जबकि नेतन्याहू काफी पीछे छूट गए हैं। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने इस घटनाक्रम पर काफी खुशी जताई है। X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह जश्न मनाने का दिन है—और साथ ही उन लोगों को याद करने का भी दिन है, जो गाजा, फिलिस्तीन में नरसंहार के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के हाथों मारे गए थे।
सौरव दास ने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हालात इसी तरह आगे बढ़ेंगे, और अंततः बेंजामिन नेतन्याहू को भी वैसी ही या उससे भी बदतर स्थिति का सामना करना पड़ेगा, जैसी उन्होंने बेगुनाह लोगों पर थोपी थी। दास अमेरिकी चुनावों के नतीजों से भी काफी खुश नजर आ रहे हैं।
**जरूरी समर्थन हासिल करना**
यह लगभग तय माना जा रहा है कि IDF के पूर्व प्रमुख गादी एजेनकोट को नवनिर्वाचित सांसदों के बहुमत का समर्थन मिल जाएगा, जिससे उनके लिए अगली सरकार बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा। गुरुवार को राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग के साथ बातचीत के दौरान, अरब राजनीतिक दलों ने एजेनकोट को अपना समर्थन देने की घोषणा की। 27 अक्टूबर को हुए चुनावों में सीटों के बंटवारे के आधार पर, एजेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिलने की उम्मीद है, जबकि इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू को 46 सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना है।
**UTG ने समर्थन देने से इनकार किया**
नेतन्याहू के लंबे समय से सहयोगी रहे 'यूनाइटेड टोरा जुडाइज्म' (UTG) ने किसी भी उम्मीदवार का समर्थन न करने का फैसला किया है—इस कदम से नेतन्याहू की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है। 120 सीटों वाली इज़रायली संसद में, नेतन्याहू के गठबंधन ने 53 सीटें जीतीं, जबकि आइज़ेनकोट के गठबंधन को 48 सीटें मिलीं। वहीं, अरब पार्टियों ने रिकॉर्ड 19 सीटें जीतीं, जिससे वे सरकार गठन में एक अहम भूमिका निभाने की स्थिति में आ गई हैं।