झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के 'JSSC-CGL' परीक्षा रद्द करने के फैसले को खारिज कर दिया है और इस कदम को अनुचित और अन्यायपूर्ण करार दिया है।
शुक्रवार को दिए गए एक अहम फैसले में, झारखंड उच्च न्यायालय ने हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा को रद्द करने के सरकार के फैसले को पलट दिया है।
इस मामले की पृष्ठभूमि क्या है?
कुछ समय पहले, झारखंड में छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद, राज्य सरकार ने 2024 की झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया। हालांकि, परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों ने सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। शुक्रवार को, झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया और इस फैसले को अन्यायपूर्ण और अनुचित करार दिया।
सरकार और उम्मीदवारों की दलीलें
18 अगस्त को, झारखंड सरकार ने 2024 की JSSC-CGL परीक्षा रद्द कर दी थी, जिससे सरकारी नौकरी की उम्मीद कर रहे हजारों उम्मीदवार अनिश्चितता की स्थिति में आ गए थे। सरकार ने तर्क दिया कि बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और प्रश्न पत्र लीक होने के सबूत मिलने के कारण परीक्षा रद्द करना जरूरी था। वहीं, उम्मीदवारों ने उच्च न्यायालय में दलील दी कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
1,932 उम्मीदवार अनिश्चितता का सामना कर रहे थे
इससे पहले अगस्त में, झारखंड उच्च न्यायालय ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी। इससे पहले JPSC की एक परीक्षा भी इसी तरह रद्द की गई थी। गौरतलब है कि JSSC-CGL के नतीजे घोषित होने के बाद 1,932 उम्मीदवारों का चयन हुआ था। इनमें से कई उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र मिल चुके थे और वे अभी अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं। ऐसे में, सरकार द्वारा परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद, इन लोगों के सामने अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर बड़ी चिंताएं खड़ी हो गई थीं। हालांकि, शुक्रवार को उच्च न्यायालय के फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है।