मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो देशों के बीच एक ऐसा समझौता है, जिसके तहत वे अपने बीच होने वाले व्यापार पर लगने वाले करों (आयात शुल्क या टैरिफ) को कम कर देते हैं या पूरी तरह से खत्म कर देते हैं।
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत आयात शुल्क में कटौती लागू हो गई है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना और भारतीय बाज़ार में कुछ विदेशी उत्पादों को सस्ता बनाना है। हालाँकि, यह छूट सभी उत्पादों पर लागू नहीं होती है; इसे बहुत सावधानी से और कुछ खास शर्तों के साथ लागू किया गया है, ताकि घरेलू उत्पादकों पर कोई बुरा असर न पड़े।
आइए, इस घटनाक्रम के विवरण और उन वस्तुओं की सूची पर नज़र डालते हैं जो इसके परिणामस्वरूप सस्ती हो जाएंगी।
भारत-न्यूज़ीलैंड FTA क्या है और यह कैसे काम करता है?
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो देशों के बीच एक ऐसा समझौता है, जिसके तहत वे अपने बीच होने वाले व्यापार पर लगने वाले करों (आयात शुल्क या टैरिफ) को कम कर देते हैं या पूरी तरह से खत्म कर देते हैं।
न्यूज़ीलैंड के साथ हुए इस समझौते में घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा करने का पूरा ध्यान रखा गया है। यही कारण है कि सरकार ने सभी वस्तुओं पर से करों को एक साथ खत्म नहीं किया है। कुछ उत्पादों पर तुरंत बड़ी कटौती की गई है, जबकि अन्य उत्पादों पर करों को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। इसके अलावा, कुछ बेहद संवेदनशील क्षेत्रों (जैसे डेयरी उद्योग) को इस समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
उन वस्तुओं की पूरी सूची जो सस्ती हो जाएंगी
इस समझौते के लागू होने के बाद, न्यूज़ीलैंड से आने वाले निम्नलिखित उत्पादों पर आयात शुल्क या तो पूरी तरह से हटा दिया गया है या काफी कम कर दिया गया है:
भेड़ का मांस (मटन/लैम्ब) – न्यूज़ीलैंड से आयात किए जाने वाले ताज़े, ठंडे (चिल्ड) और फ्रोज़न भेड़ के मांस पर लगने वाले बेसिक कस्टम ड्यूटी को घटाकर शून्य (0%) कर दिया गया है। इसके अलावा, इन उत्पादों पर लगने वाले 'एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सेस' (कृषि बुनियादी ढांचा विकास उपकर) और 'हेल्थ सेस' (स्वास्थ्य उपकर) को पूरी तरह से हटा दिया गया है। यह इस समझौते के तहत दी गई सबसे महत्वपूर्ण और तत्काल राहतों में से एक है। कीवी फल – कीवी फलों के आयात पर लगने वाले बेसिक कस्टम ड्यूटी को घटाकर 15% कर दिया गया है। यह छूट उन कीवी फलों पर लागू होगी जो कुछ खास गुणवत्ता मानकों, न्यूनतम मूल्य सीमा (2.50 डॉलर प्रति किलोग्राम या उससे अधिक) और 'रूल्स ऑफ़ ओरिजिन' (उत्पत्ति के नियम) की शर्तों को पूरा करते हैं। मानुका शहद और शहद से बने अन्य उत्पाद – न्यूज़ीलैंड का विश्व-प्रसिद्ध 'मानुका शहद' अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। इस समझौते के तहत, मानुका शहद और शहद से बने अन्य उत्पादों पर पहले लगने वाले भारी करों को काफी कम कर दिया गया है। हालाँकि, इन लाभों का पूरा फायदा उठाने के लिए, कुछ निश्चित मात्रा की सीमा और न्यूनतम आयात मूल्य जैसी शर्तों को पूरा करना होगा।
न्यूज़ीलैंड की वाइन और कुछ चुनिंदा मादक पेय – न्यूज़ीलैंड की मिड-रेंज और प्रीमियम वाइन पर आयात शुल्क में छूट दी गई है। इससे भारत में विदेशी वाइन के शौकीनों को ये उत्पाद अधिक आकर्षक और किफायती कीमतों पर मिल सकेंगे।
कुछ चुनिंदा मछली और सीफूड – न्यूज़ीलैंड से आने वाली कुछ मछलियों और सीफूड उत्पादों पर बुनियादी सीमा शुल्क (basic customs duty) को घटाकर लगभग 25.71% कर दिया गया है, जबकि AIDC (कृषि अवसंरचना और विकास उपकर) और स्वास्थ्य उपकर (health cess) को पूरी तरह हटा दिया गया है। इससे भारतीय बाज़ार और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के लिए न्यूज़ीलैंड के सीफूड तक पहुँच आसान हो जाएगी।
सेब – इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड के सेबों को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिससे आयात के मौसम में ये भारतीय बाज़ार में बेहतर और अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे।
इस समझौते में क्या शामिल नहीं है?
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस समझौते का दायरा सीमित है। भारत सरकार ने घरेलू किसानों और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए कई संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है।
डेयरी उत्पाद – दूध, मक्खन, पनीर, क्रीम और व्हे (whey) जैसे डेयरी उत्पादों को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा गया है। भारतीय डेयरी किसानों के हितों की रक्षा के लिए, इन वस्तुओं पर पहले से लागू उच्च आयात शुल्क यथावत बने रहेंगे। अन्य संवेदनशील कृषि उत्पाद: कई अन्य संवेदनशील कृषि और घरेलू उत्पादों को भी इस सूची से बाहर रखा गया है, ताकि स्थानीय किसानों और निर्माताओं पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
आम उपभोक्ता पर इसका क्या असर होगा?
रातों-रात कीमतों में कोई भारी गिरावट नहीं: करों में कमी के बावजूद, बाज़ार की कीमतों में रातों-रात कोई बड़ी गिरावट नहीं आएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि आयातकों के पास पहले से ही स्टॉक मौजूद है, और नए कर नियमों का असर दिखने में कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों तक का समय लग सकता है। चूंकि कीवी, मानुका शहद, भेड़ का मांस या प्रीमियम वाइन जैसी चीजें आम भारतीय घरों के लिए रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं नहीं हैं, इसलिए इसका असर मुख्य रूप से उन उपभोक्ताओं—और आधुनिक रिटेल बाजारों—पर पड़ेगा जो नियमित रूप से आयातित खाद्य उत्पादों का सेवन करते हैं।