SIR (स्पेशल समरी रिविज़न) प्रोसेस पर चल रही चर्चाओं के बीच, चुनाव आयोग के BLO ऐप में 'Mark VIP' फ़ीचर जोड़ा गया है। यहाँ इस फ़ीचर के बारे में जानकारी दी गई है कि इसमें क्या शामिल है, VIP वोटर्स को कैसे मार्क किया जाता है, और 2023 के ECI मैनुअल में इससे जुड़े नियम क्या हैं।
SIR प्रोसेस पर देश भर में हो रही चर्चाओं के बीच, चुनाव आयोग के BLO (बूथ लेवल ऑफ़िसर) ऐप में 'Mark VIP' नाम का एक नया फ़ीचर आया है। बूथ लेवल ऑफ़िसर (BLO) इस फ़ीचर का इस्तेमाल करके किसी वोटर को VIP या 'Marked Elector' के तौर पर मार्क कर सकते हैं।
*हिंदुस्तान टाइम्स* की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह फ़ीचर SIR प्रोसेस के दौरान BLO द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऐप में जोड़ा गया था। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के ऑफ़िस के अधिकारियों ने बताया कि ऐप को 30 जुलाई को अपडेट किया गया था। Apple App Store के रिकॉर्ड में भी "Mark VIP elector related change" नाम का एक अपडेट दिखाई देता है।
**ऐप में 'Mark VIP' फ़ीचर कब जोड़ा गया?**
Apple App Store के रिकॉर्ड के अनुसार, BLO ऐप के वर्शन 2.94 में 4 अगस्त को "Mark VIP elector related change" दर्ज किया गया था। इससे पहले, 30 जुलाई को एक और अपडेट जारी किया गया था। बाद में अगस्त और सितंबर में भी ऐप में बदलाव किए गए। ऐप के Android वर्शन (वर्शन 9.56, तारीख 31 जुलाई) के रिकॉर्ड में "VIP वोटर को मार्क करने का विकल्प जोड़ा गया" का ज़िक्र है। हालाँकि, बदलाव से जुड़ी ये खास जानकारी आधिकारिक Google Play Store लिस्टिंग पर नहीं दिख रही थी।
**BLO के लिए यह फ़ीचर कैसे काम करता है?**
रिपोर्ट के अनुसार, BLO वोटर की जानकारी का घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करते समय किसी वोटर को VIP के तौर पर मार्क कर सकता है। इसके बाद, चुनाव अधिकारी इस जानकारी का वेरिफिकेशन करते हैं। नई दिल्ली ज़िले के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि VIP मार्किंग प्रोसेस के बाद, जानकारी CEO के ऑफ़िस तक पहुँचने से पहले AERO (असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर) और ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर) के लेवल से गुज़रती है। अधिकारी के अनुसार, नई दिल्ली ज़िले में ऐसे लगभग 1,000 वोटर हैं। क्या VIP वोटरों के लिए पहले से ही अलग नियम हैं?
हाँ। यह प्रावधान पूरी तरह नया नहीं है। चुनाव आयोग के मार्च 2023 के 'मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल्स' (मतदाता सूची नियमावली) में चुनावी डेटाबेस में 'चिह्नित मतदाताओं' (marked electors) को चिह्नित करने का नियम है। मैनुअल में बताया गया है कि संसद सदस्यों (MP), विधानसभा सदस्यों (MLA) और विधान परिषद सदस्यों (MLC)—साथ ही खास पदों पर बैठे लोगों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, न्यायपालिका और जनसेवा जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों—के नामों को सही ढंग से चिह्नित किया जाना चाहिए। इसका मकसद यह पक्का करना है कि ऐसे वोटरों के नाम गलती से ड्राफ्ट मतदाता सूची से न हट जाएं। मैनुअल में यह भी कहा गया है कि ऐसे 'चिह्नित मतदाताओं' के नाम प्रस्तावित ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए जाने चाहिए।
दिल्ली में यह मुद्दा चर्चा में क्यों आया?
दिल्ली में चल रही स्पेशल समरी रिविज़न (SSR) प्रक्रिया के दौरान, ऐसी खबरें आईं कि कई जानी-मानी हस्तियों को वोटर लिस्ट की जानकारी में गड़बड़ी के बारे में नोटिस मिले हैं। खबरों के अनुसार, इनमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप-प्रधानमंत्री एल.के. आडवाणी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि वोटर का नाम अपने आप मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। किसी भी नाम को हटाने से पहले, संबंधित वोटर को सुनवाई का मौका दिया जाना चाहिए और उचित आदेश जारी किया जाना चाहिए। दिल्ली CEO की वेबसाइट के अनुसार, SSR के लिए ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त, 2026 को जारी की गई थी; जिन योग्य लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक दावा (claim) कर सकते हैं।
VIP के तौर पर चिह्नित होने का मतलब यह नहीं है कि नाम अपने आप शामिल हो जाएगा
यह समझना ज़रूरी है कि 'VIP मार्क' सुविधा का मतलब यह नहीं है कि उस व्यक्ति को किसी खास कानूनी छूट के ज़रिए मतदाता सूची में बनाए रखा जाएगा। ECI के 2023 के मैनुअल में 'चिह्नित मतदाताओं' (marked electors) को खास तौर पर चिह्नित करने का प्रावधान है। इसका मकसद नामों को गलती से हटाने से रोकना और ज़रूरी दस्तावेज़ों की जांच-पड़ताल में आसानी करना है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, VIP वोटर्स भी दावों और आपत्तियों से जुड़ी प्रक्रिया से पूरी तरह छूट नहीं पाते हैं। — दिल्ली CEO