सीतक्का ने आरोप लगाया कि कॉर्पोरेट कंपनियों को करोड़ों रुपये की सब्सिडी दी जा रही है, जबकि आम आदमी अपना गुज़ारा करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
तेलंगाना की मंत्री और कांग्रेस नेता सीतक्का ने पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ईंधन की कीमतों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। सीतक्का ने कहा कि पेट्रोल और डीज़ल की असली कीमत ₹30 प्रति लीटर से भी कम है। हालाँकि, केंद्र सरकार के टैक्स, राज्य सरकार के टैक्स और डीलर कमीशन जोड़ने के बाद, आम नागरिक पर लगभग ₹60 का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
सीतक्का ने COVID-19 महामारी का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान जनता को न तो कोई सब्सिडी मिली और न ही कोई आर्थिक सहायता। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि कॉर्पोरेट कंपनियों को करोड़ों रुपये की सब्सिडी दी जा रही है, जबकि आम आदमी अपना गुज़ारा करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
तेलंगाना की मंत्री सीतक्का ने हाल ही में ईंधन की कीमतों को लेकर चल रहे संकट के संदर्भ में ये टिप्पणियाँ कीं। हालाँकि उनके बयान की सटीक तारीख नहीं बताई गई थी, लेकिन उनकी टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब पूरे देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें घरेलू बजट पर भारी दबाव डाल रही हैं।
**सीतक्का ने कराधान नीतियों पर सवाल उठाए**
सीतक्का तेलंगाना में बोल रही थीं, जिस राज्य में वह वर्तमान में मंत्री के पद पर हैं। उनकी टिप्पणियाँ राज्य के भीतर लागू की गई टैक्स नीतियों और केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए शुल्कों, दोनों पर केंद्रित थीं, जो तेलंगाना और अन्य जगहों पर बढ़ते जन असंतोष को दर्शाती हैं।
मंत्री ने यह बयान आम लोगों द्वारा झेली जा रही गंभीर आर्थिक कठिनाइयों को उजागर करने के लिए दिया। उन्होंने तर्क दिया कि ऊँचे टैक्स और महामारी के दौरान राहत की कमी के दोहरे झटके ने आम आदमी को गुज़ारे के संकट के कगार पर पहुँचा दिया है। इस स्थिति की तुलना कॉर्पोरेट कंपनियों को दी जा रही भारी सब्सिडी से करके, उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने की कोशिश की। उनका उद्देश्य जनता के आक्रोश को आवाज़ देना और टैक्स सुधारों या कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के लिए दबाव डालना प्रतीत होता है।
सीतक्का ने आम आदमी पर बढ़ते बोझ को उजागर किया
सीतक्का ने अपनी बात कहने के लिए एक सीधा और तीखा तरीका अपनाया। उन्होंने ईंधन की कीमतों को उनके अलग-अलग हिस्सों में बाँटकर समझाया—₹30 से कम की मूल कीमत और लगभग ₹60 के टैक्स—यह दिखाने के लिए कि आम आदमी पर बोझ कई गुना कैसे बढ़ जाता है। उन्होंने गरीबों को दी गई "शून्य" राहत और कॉर्पोरेट संस्थाओं को दी गई भारी सब्सिडी के बीच एक तीखा अंतर भी बताया। उनकी इन टिप्पणियों ने अब एक राजनीतिक बहस छेड़ दी है, और विपक्षी दलों ने उनकी इस आलोचना को एक अहम मुद्दा बना लिया है।