- 'क्या हम पूरी ज़िंदगी मज़दूर ही बने रहेंगे?' एक छात्रा ने अपने स्कूल में सुविधाओं की कमी की शिकायत करते हुए डिप्टी सीएम को एक लेटर लिखा।

'क्या हम पूरी ज़िंदगी मज़दूर ही बने रहेंगे?' एक छात्रा ने अपने स्कूल में सुविधाओं की कमी की शिकायत करते हुए डिप्टी सीएम को एक लेटर लिखा।

महाराष्ट्र के बीड की एक छात्रा अंकिता ने उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को एक चिट्ठी लिखकर अपने स्कूल में पानी, शौचालय और खेल के सामान जैसी बेसिक सुविधाओं की कमी की शिकायत की है, और भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया है।

महाराष्ट्र के बीड जिले के एक छोटे से गांव की एक छात्रा द्वारा लिखी गई चिट्ठी ने पूरे प्रशासन को सवालों के घेरे में ला दिया है। परभणी के केसापुरी गांव के जिला परिषद स्कूल की छात्रा अंकिता कवचाट ने सीधे राज्य के उपमुख्यमंत्री और बीड के पालक मंत्री अजीत पवार को चिट्ठी लिखकर अपने स्कूल की खराब हालत और वहां फैले भ्रष्टाचार के बारे में बताया है। यह चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, और लोग लड़की की हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं।

अपनी चिट्ठी में अंकिता ने लिखा है कि स्कूल में साफ पीने का पानी, चालू शौचालय, हाथ धोने की सुविधा, सही क्लासरूम, खेल का सामान और पढ़ाई का सामान नहीं है। प्रोजेक्टर, वॉटर फिल्टर और खेल के सामान जैसी चीजें कागजों पर तो लिखी हैं, लेकिन असल में मौजूद नहीं हैं। छात्रा ने बताया कि उसे और उसके साथी छात्रों को हर दिन इन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, फिर भी वे अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं क्योंकि शिक्षा ही तरक्की का एकमात्र रास्ता है।

सरपंच पर सवाल उठे, गांव में चर्चा तेज

जैसे ही यह चिट्ठी वायरल हुई, गांव की सरपंच प्रतिभा शिंदे से इस बारे में सवाल पूछे गए। उन्होंने कहा, “हमारे गांव के बच्चे जानते हैं कि प्रधानमंत्री और उपमुख्यमंत्री कौन हैं; यही विकास है। लेकिन अगर लड़की ने शिकायत की है, तो जांच होनी चाहिए।” सरपंच ने यह भी कहा कि वह जल्द ही छात्रा से मिलकर उसकी शिकायतें समझेंगी।

अंकिता की चिट्ठी बहुत ही भावुक और सरल भाषा में लिखी गई है। वह यह लिखकर शुरू करती है कि इतने बड़े व्यक्ति को लिखते समय उसके हाथ कांप रहे थे, लेकिन अपना दर्द बताना ज़रूरी था। उसने लिखा, “दादा, क्या हमारी किस्मत में ज़िंदगी भर गन्ने काटने का काम ही लिखा है? क्या हमारे सपने नहीं हैं? हम भी डॉक्टर, टीचर और ऑफिसर बनना चाहते हैं।” अंकिता ने कहा कि स्कूल उनके लिए "ज्ञान का मंदिर" है और टीचर लगन से पढ़ाते हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी बच्चों की तरक्की में रुकावट डालती है।

कागजों पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए

चिट्ठी में उसने साफ तौर पर कहा कि स्कूल के लिए अलग-अलग सुविधाओं पर कागजों पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए हैं, लेकिन बच्चों को कोई फायदा नहीं मिलता। गांव में यह भी चर्चा है कि कुछ स्थानीय लोग स्कूल के कामकाज और फाइनेंस को कंट्रोल करते हैं, लेकिन कोई असली डेवलपमेंट नहीं दिख रहा है। अंकिता लिखती है, "हम रोज़ अपनी आँखों से स्कूल देखते हैं, लेकिन कुछ नहीं बदलता।"

अंकिता के पत्र ने सरकार और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उसने लिखा, "अंकल, आप हमारे गार्जियन मंत्री हैं। हम ज़्यादा कुछ नहीं माँगते। बस हमें साफ़ पानी, साफ़ टॉयलेट, खेल का सामान और एक ईमानदार सिस्टम दीजिए जो काम करे।" उसने यह कहते हुए बात खत्म की कि वह छोटी है, लेकिन उसका दुख बहुत बड़ा है, और डिप्टी चीफ मिनिस्टर का एक फ़ैसला कई बच्चों का भविष्य बदल सकता है।

पत्र वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलचल

यह पत्र बीड और आस-पास के ज़िलों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। अधिकारी इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि अगर एक छोटी लड़की इतनी गंभीर समस्याओं को उजागर कर रही है, तो ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की हालत कितनी खराब होगी। पत्र वायरल होने के बाद, स्थानीय प्रशासन पर अब कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।

अंकिता का पत्र सिर्फ़ एक स्कूल की समस्याओं को ही उजागर नहीं करता; यह ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की ज़मीनी हकीकत को दिखाता है। कुछ जगहों पर सुविधाएँ सिर्फ़ कागज़ों पर हैं, कुछ जगहों पर भ्रष्टाचार बच्चों की शिक्षा में रुकावट डाल रहा है, और कई जगहों पर कोई बोलने वाला नहीं है। इस लड़की ने हिम्मत दिखाई और उन हज़ारों बच्चों के लिए आवाज़ उठाई जिनका भविष्य बेसिक सुविधाओं की कमी के कारण खतरे में है।

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