चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर एक सवाल का जवाब देते हुए इतने गुस्से में आ गए कि उन्होंने अपना आपा खो दिया और जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव की तुलना कुत्ते से कर दी।
चुनाव रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर बिहार के किशनगंज में पत्रकारों से बात करते हुए अपना आपा खो बैठे। उन्होंने जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव को लेकर विवादित टिप्पणी कर दी। प्रशांत किशोर ने जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव की तुलना कुत्ते से की है।
क्या कहा प्रशांत किशोर ने?
दरअसल, पत्रकारों ने प्रशांत किशोर से पूछा था कि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा ने आप पर शराब माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगाया है। इस सवाल पर प्रशांत किशोर भड़क गए और जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव की तुलना कुत्ते से कर दी। प्रशांत किशोर ने कहा कि वह सड़क पर टहलते कुत्ते की बातों का जवाब नहीं देते।
बता दें कि प्रशांत किशोर रविवार देर शाम बदलाव यात्रा के लिए किशनगंज पहुंचे थे। उन्होंने शहर के अंजुमन इस्लामिया परिसर में बदलाव सभा को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने धर्म के साथ-साथ पैगंबर मोहम्मद साहब का ज़िक्र करके सभा में मौजूद मुस्लिम समुदाय का दिल जीतने की कोशिश की।
उन्होंने भाजपा सांसद संजय जायसवाल पर भी गुस्सा जताया।
जब पत्रकारों ने प्रशांत किशोर से पूछा कि भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी नोटिस भेजा है, तो पीके ने कहा कि संजय जायसवाल जैसे 100 नेता भी आ जाएँ, तो भी वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब गीदड़ मरने वाला होता है, तो वह शहर की ओर भागता है और संजय जायसवाल जैसे लोग प्रशांत किशोर को नोटिस भेजते हैं।
जेडीयू को 25 सीटें नहीं मिलेंगी - पीके
जब प्रशांत किशोर से पूछा गया कि आपने कहा है कि अगर जेडीयू को 25 सीटें मिलीं, तो आप राजनीति छोड़ देंगे। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जैसे बंगाल में बीजेपी को 100 सीटें नहीं मिलीं, वैसे ही बिहार में जेडीयू को 25 सीटें नहीं मिलेंगी और वह राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे।
प्रशांत किशोर ने सियासी पैंतरा पार करने के लिए न सिर्फ़ ख़ुद मुस्लिम टोपी पहनी, बल्कि उनके कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच टोपियाँ भी बाँटीं। सभा में आए लोगों के लिए नाश्ते का इंतज़ाम किया गया था, जहाँ भारी भीड़ जमा हो गई और लोग धक्का-मुक्की करते नज़र आए। लोगों ने बताया कि खाना और 500 रुपये देने की बात हुई थी, लेकिन सिर्फ़ नाश्ता दिया गया, जबकि वे पूर्णिया और अररिया ज़िलों से लंबी दूरी तय करके यहाँ आए थे।