इन्दौर / पत्रकारिता जगत के कई जाज्वल्यमान नक्षत्रों से देश दुनिया को नई रोशनी देने वाला और स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार छः बार प्रथम स्थान पर आ दुनिया भर में नम्बर वन के रूप में पहचान बनाने वाला शहर इन्दौर फिर एक बार फिर एक अभूतपूर्व प्रसंग को लेकर नई पहल के साथ चर्चित हो गया है। और यह अभूतपूर्व प्रसंग है इन्दौर के एक पत्रकार द्वारा इन्दौर की पत्रकारिता और इन्दौर की स्वच्छता पर शोध का। इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला ने ‘‘इंदौर शहर में स्वच्छता के प्रति जागरूकता में मीडिया की भूमिका‘‘ शीर्षक से पी एच डी करवाईं है और संभवतः यह स्वच्छता पर पहली पीएचडी है।
इन्दौर के पत्रकार जितेन्द्र जाखेटिया ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्यनशाला विभागाध्यक्ष डॉ सोनाली नरगुंदे के निर्देशन में देश में चल रहे स्वच्छता अभियान पर इंदौर को केंद्रित कर अपना शोधकार्य प्रस्तुत किया। तत्पश्चात देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्यनशाला से स्वच्छता पर पहली पीएचडी अवार्ड हुई है। शोध में इंदौर की स्वच्छता के 223 वर्षों के इतिहास को समाहित किया गया है।
शोध पत्र के बारे में डा नरगुंदे ने बताया, शोध में स्वच्छता अभियान के इतिहास से लेकर अभी तक के सभी प्रयासों को शामिल किया। शोध में 700 लोगों, खासकर स्वच्छता कर्मियों से प्रश्नावली भरवाई और 300 किताबों व आलेख का गहन अध्ययन करने के बाद अपना शोध कार्य किया। इंदौर के स्वच्छता अभियान संबंधी सभी कदमों को उपयोगिता के मापदंड पर परखने के लिए मध्यप्रदेश के अन्य 4 शहरों भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर से इंदौर की तुलना भी की गई।
शोध में यह निष्कर्ष रहा कि मीडिया के माध्यम से ही जनता को हर महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध हुई । जिससे की जनता शिक्षित हुई और एक जन जागरण का आगाज हुआ जिसमे राजनीतिक इच्छाशक्ति भी सम्मिलित हुई। इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने के लिए जनता के व्यवहार में परिवर्तन में इस शहर के प्रिंट मीडिया ने सबसे अहम भूमिका का निर्वहन किया । प्रिंट मीडिया के द्वारा जिस तरह से जनता को शिक्षित और जागरूक करने का काम किया गया उसी का परिणाम है कि वर्ष 2017 में इंदौर देश के स्वच्छता सर्वेक्षण में पहली बार नंबर एक पर आने के बाद से लगातार छः बार नम्बर एक पल बना हुआ है।